युवाओं की जागरूकता लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति
युवाओं की जागरूकता लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति :- सक्षम हिंदुस्थानी
दिल्ली में जंतर मंतर पर हाल ही में आयोजित CJP के प्रदर्शन ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि देश का युवा वर्ग JNU प्रकरण जैसे देश विरोधी व झूठे नारों से प्रभावित होने वाला नहीं है। दीपके अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे सिर्फ क्रांति के लिए भारत नहीं आये। उमर खालिद जैसे व्यक्ति से इनकी नजदीकियां जगजाहिर हैं, सोनम वांगचुक (पर्यावरणविद) कुछ महीने पहले मोहम्मद योनस के साथ नजर आए तो युवा वर्ग ने समझा है कि यह कौन लोग हैं? कॉकरोच शब्द का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करूंगा न ही युवाओं को इससे संबोधित करूंगा, CJI सूर्यकांत जी ने भी अलग संदर्भ में कहा था जिसको अलग अर्थ देकर प्रस्तुत किया गया और वह नेता नहीं है कि बार - बार स्वयं के बचाव में बयान जारी करते रहें।
देश का युवा बहुत समझदार व सुलझा हुआ है बल्कि अराजकता फैलाने वाली ताकतें यह चाह रहीं हैं कि हम युवा का मजाक बनाएं, वह भड़के और वह कुछ नेपाल व बांग्लादेश जैसा करें।
आज का भारतीय युवा शिक्षित, तार्किक, अध्ययनशील और विवेकशील है। वह किसी भी मुद्दे को भावनाओं के बजाय तथ्यों और राष्ट्रीय हित के आधार पर परखने का प्रयास करता है। देश के युवाओं में राष्ट्र के प्रति समर्पण और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही कारण है कि वे ऐसे किसी भी ऐसे प्रयास के प्रति सजग रहते हैं जो समाज में अनावश्यक विभाजन या अस्थिरता पैदा कर सकता हो। युवा पीढ़ी समझती है कि भारत की प्रगति सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने में निहित है।
व्यवस्था तंत्र के लोगों से न्यून्ताएं हुई हैं, बार - बार हुई हैं यह भी सत्य है, उस पर प्रतिक्रिया भी करनी चाहिए, करते हैं व लगातार करते रहना ही उन्हें सजग व सतर्क रखता है। पढ़ा- लिखा युवा RTI लगाकर जवाब मांगता है, email लिखता है, X(Twitter) पर लिखता है फिर उसके उत्तर/प्रतिक्रिया अनुसार उसको वीडियो बनाकर समाज में प्रदर्शित करता है।
आज का भारत विश्व मंच पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश का युवा इस परिवर्तन का प्रमुख भागीदार है। वह चाहता है कि देश विकास, नवाचार और अवसरों के मार्ग पर आगे बढ़े। इसलिए वह उन परिस्थितियों से बचने के पक्ष में है जो किसी भी प्रकार की अराजकता या अस्थिरता को जन्म दे सकती हैं।
लोकतंत्र में मतभेद और विरोध स्वाभाविक हैं, किंतु राष्ट्रहित सर्वोपरि रहना चाहिए। भारतीय युवाओं की जागरूकता और देशभक्ति यह विश्वास दिलाती है कि वे भारत को एक मजबूत, सुरक्षित और विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
लेखक की कलम से........✍🏼
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