विपक्ष के सवाल या नैरेटिव और इसका सुधार
असल मुद्दे या बेबुनियाद:- विपक्ष ने पिछले वर्षों में जितने भी मुद्दे उठाए किसी को भी देश के खिलाफ साबित नहीं कर पाए। अगर वह असल की समस्या होती तो क्या वह मुद्दे हर परिस्थिति/समय में ज्वलंत रहते; लेकिन वह सिर्फ Narrative थे। पिछला जुमला फेल होता गया नया बनता गया। जो असल मुद्दे हैं उनपर सदन में चर्चा से भागता विपक्ष जनता के सामने है और अपने बनाये मुद्दे जनता पर थोपे जा रहे हैं। जनता को नुकसान क्या है- शासन/प्रशासन असल काम करने के स्थान पर विपक्ष के भटकाये विषयों पर उत्तर देने को अटक जाते हैं और यह उत्तर सुनते भी नहीं। कोई गलत योजना आई भी है तो विपक्ष को चाहिए कि वह सदन में चर्चा करें, लेकिन वह हर बार लोकसभा व राज्यसभा से वाकआउट करते हैं। इससे नुकसान विपक्ष को ही है क्योंकि वहां वे तथ्य से सरकार को घेर सकते थे, वहां जनता भी उनको सुनती। सरकार को कोई नुकसान नहीं है वह अपने 12 बिल मानसून सत्र में पास करवा चुके हैं बल्कि कोई उन बिलों में त्रुटि रही भी होगी तो जिनका यह काम है - विपक्ष उनकी चर्चा न करने के कारण उसका प्रभाव जनता पर आएगा। ...