लड़े थे मिलकर यह जवान भगत, राजगुरु, सुखदेव, आज़ाद
लड़े थे मिलकर यह जवान भगत ,राजगुरु ,सुखदेव ,आज़ाद मन मे थी शिद्दत बचपन से करें काम अनोखा जग में , पढ़ी पढ़ाई क्रांतिकारी लगाएं स्वतंतत्रता की चिंगारी करी सहायता "स्वदेशी आंदोलन" में गली गली में 'विदेशी ज्वलंत' सराबा करतार , सावरकर वीर आदर्श मानते थे जिनको ये वीर अहसहयोग में जान लगाई चोरा चोरी नेआजादी भगाई मन मे ज्वाला भड़क उठी पूर्ण अहिंसा ठीक नहीं करेंगे ऐसा संग्राम वहाँ भड़क उठे नोजवान जहां एक एक से टोली बनाई बिस्मिल, अशफाख, रोशन से सजाई काकोरी ट्रेन से धन जुटाया पकडे गए लेकिन कोई ना बचपाया की सेना तैयार मिलकर फिर एक बार लड़े थे मिलकर यह जवान भगत, राजगुरु, सुखदेव ,आजाद *सोचा नहीं पड़ेगा फर्क दुनिया में इस बार करना होगा जागरण इसमें घूमना पड़ेगा घर-घर ,दुकान दुकान अगर समाज में जागरण होगा तभी सेना में विकास होगा लोग बढेंगे,लोग मिलेंगे ,लोगों की ही ताकत होगी लोग ही जब अपनी बोलेंगे अंग्रेजी रुह तड़प उठेगी* बम बनाना सीखा इन्होंने सोच संसद में अब फेकेंगे सोए हुए लोगों को फिर एक बार जगाएंगे कहा भगत नें...