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1$Above 90₹

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🏵️🇮🇳🏵️🇮🇳🏵️🇮🇳🏵️🇮🇳🏵️🇮🇳🏵️ `$1 = 90.23 ₹` बिल्कुल चिंता का विषय है, शत प्रतिशत। लेकिन क्या केवल सरकार के लिए या हम देशवासियों के लिए भी। केवल सरकार की ही जिम्मेदारी है क्या???? सरकार तो स्वदेशी, Vocal for Local, Made In India and Make In India का नारा अच्छे से समझा रहे हैं, अर्थव्यवस्था का ध्यान करवा रहे हैं। Artical छप रहे हैं। लेकिन हम अपना नागरिक कर्तव्य क्यों नहीं निभा रहे??? हमारा Preffered Shoping app *Amazone* है हमें product अमेरिकी पसंद आ रहे हैं।  इस पर जापान की बात हमारे सबके व्यवहार में लाने योग्य है कि जब अमेरिका ने जापान में परमाणु हमले किये उसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार की नीतियों के अनुसार अमेरिकी उत्पाद जापान जाते थे तो भी सभी जापानी स्वदेशी उत्पाद ही प्रयोग करने लगे अपितु अमेरिकी उत्पाद जापान की तुलना में बेहतर थे। लेकिन जापान के लिए देश पहले था। हम भी अपना स्तर बढ़ाये, क्रिकेट मैच और रक्षा बलों के साथ-साथ यदि देश को मजबूत बनाएंगे तो यही रक्षाबल मजबूत होंगे, किसान मजबूत होगा, व्यापारी मजबूत होंगे और रोजगार बढ़ेगा।  हम हमारे देश के व्या...

Understanding RSS

https://www.youtube.com/live/Sy5VFct4IjI?si=Nvr6KsfgC5p--jK_ *`Ideas of India Summit 2025 ABP News`* *Program:- Understanding RSS* *Reporter :- Megha Prasad* *Answered by :- Arun Kumar Ji (Sahsarkarywah RSS)* ●संघ को यदि समझना है तो संघ की आंखों से देखना चाहिए क्योंकि संघ के साथ ऐसा है कि संघ की बात पहले पहुंच जाती है और संघ बाद में पहुंचता है तो जहां फिर हम पहुंचते हैं वहां अनेकों प्रश्न उत्तर हमारे सामने आते हैं हालांकि कभी कभी इसमें आनंद भी आता है। ● "भारत" एक राष्ट्र है, प्राचीन राष्ट्र है, सनातन राष्ट्र है, हिंदू राष्ट्र है। ● भारत के बारे में तीन विचार प्रचलित हैं:-  एक विचार कहता है कि भारत 1947 के बाद राष्ट्र बना या बनना प्रारंभ हुआ।   दूसरा विचार कहता है कि भारत कई राष्ट्रों से मिलकर बना है, यह एक Sub- Continent है।  ये दोनों ही विचार गलत है। ● पश्चिम में राज्य Nation बनाते हैं लेकिन जैसा कि रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा है कि भारत में व्यक्ति, व्यक्ति से राष्ट्र बनता है। राष्ट्र पहले बना है इसका वर्णन वेदों में, रामायण, महाभारत आदि में हैं राज्य बाद में आवश्यक अ...

व्यक्तिगत हित से बड़ा राष्ट्रीय हित

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*व्यक्तिगत हित से बड़ा राष्ट्रहित*  *संदर्भ :- `डॉ गोपीनाथ शर्मा` (राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार)* *`D.R. भण्डारकर` (20वीं सदी के प्रसिद्ध इतिहासकार)* वर्ष 1020 का समय था। यह वह काल था जब वर्ष 1000 से 1027 तक 17 बार महमूद गजनवी ने भारत के विभिन्न हिस्सों से लूटपाट की जिसमें सोमनाथ का मंदिर भी प्रमुख स्थान था।  इस समय मेवाड़ के शासक गुहिल राजवंश के शासक व "बप्पा रावल" (कालभोज) की 7 वीं पीढ़ी के वंशज शासन कर रहे थे। राजा चंद्रभोज का शासन था। वे ज्ञानी, प्रतापी, न्यायप्रिय, वीर योद्धा व प्रजा पालक शासक थे।  एक बार कामुकता के आवेश में एक कन्या के साथ दुर्व्यवहार कर बैठे। दरबार बुलाया गया व न्याय की मांग की गई। राजा ने स्पष्ट कहा कि कन्या और उनके पिता जो भी दंड कहेंगे राजा उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे। उस समय में बलात्कारी को देश निकाला अथवा मृत्यु दंड दिया जाता था।  यह वो समय था जब भारत के विभिन्न हिस्सों में महमूद गजनवी का लूटपाट चल रहा था। कन्या के पिता ने राजा को उनकी भुल का अहसास करवाया व तत्कालीन परिस्थितियों का भान करवाया व सेना को नेतृत्व प्रदान देने हेतु रा...

सच झूठ

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*सच-झूठ* सच बोलना जब से शुरू किया है, तब से न जाने कितनों को गिला है, सच सहना बाज़ार में बंद सा हो गया है, सच कहने वाला 'ना'समझ सा हो गया है, सच सुनने व सहने की आदत कम हो गई है, हरिश्चंद्र के देश में न जाने ये लत कैसे हो गई है, क्या नाम कहूँ क्या नाता कहूँ क्या रिश्ता कहूँ मैं, कहते-कहते ही अब सबको झूठ निभाने की आदत हो गई। रचना :- सक्षम हिंदुस्थानी Saksham Hindusthani  🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ Follow my whatsapp channel👇. https://whatsapp.com/channel/0029Va5RUMDIyPtSJh5LPI2D/1870 ______________________________

दृश्य लोकसभा 2024

लड़ते थे जो सदा हमेशा भ्रष्टाचार के मुद्दों पर, लोकपाल को लाने बैठे अनशन करने गद्दों पर; आज मूड जो ऐसा बदला बैठे उन्हीं की गोदी में, जिनसे थी तकलीफ सदा बंध गए उनसे शादी में। अभी 60 साल का युवा है जो बोलने का जिसको ढंग नहीं, सलाहकार पित्रोदा वह है जिसको भरत भूमि का संग नहीं; माता और बहिनिया ने तो हार मान ली है अब, अधेड़ राजकुमार न जाने बाज आएंगे कब। अब हर साल जो बदल मंत्री क्या वह काम कर पाएगा, भ्रष्टाचार हो जिनकी नस में वह क्या बदलाव लाएगा; क्या है गारंटी नहीं लड़ मरेंगे सत्ता के आगोश में, राज्यों में जो मर रहे हैं एक दूसरे से आवेश में। नाम रखकर क्या देश का क्या देशभक्त बन जाओगे, I.N.D.I.A. बनकर भी तुम क्या INDIA से वफादारी निभाओगे; दशकों सत्ता में सहा है तुमको अब नहीं फंस जाएंगे, राष्ट्रीय सुरक्षा की खातिर तुमको अंतिम धूल चटाएंगे। ।।लोकतंत्र अमर रहे ।।भारत माता की जय।। ~सक्षम हिंदुस्थानी

हर बार हिंदू ही क्यों??

किसी भी मीडिया प्लेटफार्म पर चले जाओ जिसको देखो हिंदुओ को ही सुझाव दे रहा है। अरे तथाकथित सेक्युलरों  क्या हिंदू भारत का नागरिक नहीं है क्या? हिंदू के अंदर कोई भावना नहीं है क्या? हिंदू को हिंदुस्थान में रहने के लिए कितने कष्ट सहने होंगे? क्या हिंदुओ का मानवाधिकार नहीं होता क्या? वर्षों से यही उल्टी गंगा बहती आ रही है... जो नसबंदी का विज्ञापन उर्दू में लिखना था वो हिंदी में लिखते रहे... जो धर्मनिरपेक्ष का पाठ मस्जिदों/मदरसों व गिरजाघरों में पढ़ाना था मंदिरों व गुरूद्वारों में पढ़ाते रहे... जो प्यार,भाईचारे की कक्षा शांतिदूतों के लिए होनी चाहिए थी वो सनातनियों को दी गई... जो अपेक्षा शांति बनाए रखने के लिए तथाकथित अल्पसंख्यकों से करनी चाहिए थी वो हिंदुओ से की गई। आखिर कब तक सहेगा हिंदू कब तक और कब जगेगा हिंदू , न जाने कब?? ख़िलजी आया ,हिंदू नहीं जागा, गौरी आया ,हिंदूनहीं जागा गजनवी आया,हिंदू नहीं जागा,  बाबर आया,हिंदू  नहीं जागा कश्मीर पर नहीं जागे, केरल और बंगाल पर नहीं जागे अंग्रेजों ने हमें जातियों में बांटा ,हम बंट गए, जिसने जगाने का प्रयास किया उसी का विरोध किया। आज फिर व...

The ancient water bottle (chagal- छागल)

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#सुनो #छागल नाम तो सुना होंगा  इस पीढ़ी में बहुत कम लोग होंगे जो इस मोटे कपड़े की थैली से परिचित होंगे  इसे #छागल कहा जाता है  ये नाम सुनकर कई लोग चौंक पड़ेंगे कि #पानी कपड़े की थैली में ??? ये उन दिनों की बात है जब न बाजार में बोतल बंद पानी मिलता था ना #पानी_का_व्यापार होता था न कोई कैम्प थे न #Milton की बोतलें थी  गर्मी में पानी पिलाना #धर्म और खुद का पानी घर से लेकर निकलना अच्छा #कर्म माना जाता था, गर्मी के दिनो मे उपयोग आने वाली ये #छागल एक  मोटे कपड़े (कैनवास) का थैला होता था,जिसका सिरा एक और बोतल के मुंह जैसा होता था और वह एक लकड़ी के गुट्टे से बंद होता था आप में से किसने इसका उपयोग किया है ??? #छागल में पानी भरकर लोग,यात्रा पर जब जाते थे,कई लोग ट्रेन के बाहर खिड़की पर उसे टांग देते थे,बाहर की हवा उस कपड़े  के  थैले के छिद्र से अंदर जाकर पानी को ठंडा करती थी #वो_प्राकृतिक_ठंडक_बेमिसाल_थी  गर्मी में जीप में अंदर अफसर बैठे है उनकी छाग़ल बाहर जीप पर लटकी रहती थी किसान बैलगाड़ी के खल्ले पर छागल  लटकाए मंडी की तरफ जाते देखे गए। य...