भारत माँ का बेटा हूँ मैं सच पर मिटने वाला हूँ

भारत माँ का बेटा हूं मैं सच पर मिट्ने वाला हूँ ,
सवा अरब की ताक़त का मैं महिमां गाने वाला हूं।
इतिहास देखकर बाबर का मैं रामकथा का गायक हूं,
जो शीश काटदे दुश्मन का उस कसौटी का परिचायक हूं .
(ओर सुनिए)
मैं आदर करता हूं बुद्ध और महावीर के कथनों का,
मैं नमन करता हूं गाँधी के समरसता वाले वचनो का 
लेकिन मैं अहिंसा का सन्देश नहीं गा सकता हूं,
साढ़े 7 लाख की कुर्बानी को नाज़ायज़ नहीं कह सकता हूँ 
(आपको मेरी हर कविता कहीं न कहि उन 7L 32h 700 के लगभग क्रांतिकारी बलिदान हुए उनकी याद ज़रूर कराएगी, उनके बिना हम कुछ भी नहीं।)

(भगवा को अपशब्द कहने वाले ज़रा सुनले क्या है भगवा)
सुबह के उगते सूरज का परम रंग है भगवा
पवित्र तिरंगे की पहली पट्टी भी तो है भगवा
भगत सिंह का गाया बसंती चोला भी तो है भगवा
गोविंद, शिवा, प्रताप ने भी तो फहराया है भगवा
शौर्य और शक्ति का प्रतीक जिसे कहते है हम भगवा 
परमपिता का मानव को दीया हुआ वरदान है भगवा 

(गलती करे वो व्यक्ति बुरा बुरा न कोई पंथ)
(सेक्युलरिस्म देखना साहब .....)
भगवा जिसे तुम आतंकवादी सरे आम कह जाते हो  
शांति प्रियों के सौ- सौ अत्याचार पर चुप कैसे रह जाते हो 
एक दादरी से तुम भगवा को गलत तक कह जाते हो  
बंगाल, केरल ,काश्मीर पर फिर तुम चुप क्यों रह जाते हो

( आप देखिये हमारे देश में जहां 70% हिन्दू  है वहां मुसलमान व्यक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उप -राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री हो सकता है  फिर भी यदि भगवा आतंकवाद है तो कहना चाहता हु ...)

भगवा सुरक्षा का सूचक है काम गलत नहीं कर सकता है , 
चरित्र त्यागकर भी ये आतंकवादी कभी नहीं बन सकता है ,
भगवा ने सदा रण में शत्रु शरणार्थी माफ़  किये है जी  
जो गलत था मोके पे भगवा ने उसी को ही तो साफ़ किया है जी  
उठालो किताबे, जांच करवालो निहथे को सदा छोड़ दिया है 
आतंकवादी बतलाने वाले भी बोल पा रहे क्योंकि 
भगवा ने इन्हे भी कभी माफ़ किया है जी

(यदि भगवा उदारवादी नहीं होता तो ....)
16 बार ना गोरी माफ़ किया जाता चौहानों से 
युद्ध देख कर हथियार ना छूटे होते अशोका से   
नियम पालन कभी ना किये होते यूँ रणभूमि में 
राम मंदिर का विषय ना लटका रहता ऐसे वर्षों सदनों में 
 (चेतावनी ....)
बंटवारे का कत्लेआम फिर तुम ना कर सकते थे   
पीठ पे चुरा तुम कभी नहीं खोप सकते थे  
काश्मीर में तुम किसी को छू भी नहीं जा सकते थे  
संसद में सरेआम तुम आतंकवादी बोल नहीं पा सकते थे  
बंगाल, केरल, काश्मीर को दूषित नहीं कर सकते थे 
भगवा को तुम कभी कलंकित नहीं कर सकते थे 

और न्यायपालिका ज़रा धयान दे ........)
हमने सदा तुम्हारा आदर किया है हमसे तुम यूं मत खेलो 
ज़्यादा संयम करवाकर हमको कायरता में मत बदलो  
नियमो के राग केवल भगवा वालों को सुनाते हो 
बाकी मुद्दों पर ऐसे चुप कैसे रह जाते हो   
यदि एक हो गए आगे फिर  अंजाम जानते हो 
भगवा के भगवा होने की पहचान जानते हो
भगवा के भगवा होने की पहचान जानते हो....

सक्षम हिंदुस्थानी
2 जुलाई, 2019

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बचपन से आज़ादी

My thoughts on the current situations/ वर्तमान परिस्थितियों पर मेरे विचार