हिंदू मुस्लिम क्यों????
हिंदू - मुस्लिम क्यों करते हो???
यही प्रश्न उन सभी के दिमाग में आता है जो कुछ तथ्यों से अनजान हैं अथवा वामपंथी इतिहास ही जानते हैं।
हिंदू-मुस्लिम कौन करता है यह जानने के लिए आइये कुछ तथ्यों पर नज़र डालते हैं ज्यादा पीछे नहीं 20वीं शताब्दी के तथ्य ही देखेंगे।
ग्रीक, हूण, शक, यवन, मुगल व अंग्रेजों से लड़ते- लड़ते हम आज 21 वीं सदी में स्वतंत्र जीवन जी रहें हैं।
बाकि आक्रांता जब आकर भारत पर आक्रमण करते हैं लूटते हैं चले जाते हैं अपनी पंरपरा हम पर नहीं थोपते उन्हें हम केवल लुटेरे कह सकते हैं जो केवल सत्ता या संपत्ति के लिए आये हों जो कि विभिन्न प्रकार के शासक करते आये हैं।
लेकिन आधुनिक भारत में 1900 के बाद जब अंग्रेज तत्कालीन शासक थे तब मोहनदास करमचंद गांधी के सहभागिता से खिलाफत आंदोलन हुआ (1919- 1924) यह हम सब जानते हैं। Narrative ये था कि यह स्वतंत्रता का आंदोलन है लेकिन Reality में यह तुर्की के खलीफा के पक्ष में हुआ आंदोलन था।
यह विवाद मुसलमान व अंग्रेजों के बीच में था लेकिन प्रतिक्रिया स्वरूप उसमें कटा व मरा कौन???
हिंदू (मोपला कांड) ।इस घटना का जिक्र डॉ. भीमराव अंबेडकर की किताब 'पाकिस्तान और द पार्टिशन ऑफ इंडिया' में भी मिलता है, जिसमें उन्होंने इस कांड की आड़ में हुई क्रूरता और सांप्रदायिक प्रकृति पर प्रकाश डाला है। सी. गोपालन नायर ने अपनी पुस्तक 'द मोपला रिबेलियन' में मोपला विद्रोह के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया है।
Direct Action Day विवाद था कांग्रेस के पूर्व व वर्तमान नेता का यानि मोहम्मद अली जिन्ना और जवाहर लाल नेहरू के बीच की आजाद भारत पर पहली सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।
परिणाम स्वरूप विभाजन। लेकिन विभाजन से भी 1 वर्ष पूर्व जो हुआ कलकत्ता सहित देश के कई अन्य हिस्सों में कत्लेआम और इसमें भी कटा व मरा कौन??? हिंदू
विभाजन की विभीषिका को तो कौन भूल पाया है जिसमें रोज़ हिंदू-सिखों आदि की लाशों से भरी हुई ट्रेनें पाकिस्तान से भारत आ रही थी तात्कालिक इतिहासकारों के अनुसार दुनिया का सबसे बड़ा मानवता का नाश उस समय हुआ जिसमें 11-16 लाख हिंदू-सिख आदि मारे गए।
गांधी हत्या का दंश आतंक का कोई मजहब नहीं होता कहने वालों ने गांधी जी की हत्या के आरोप में हत्या करने वाले के मत, जाति व क्षेत्र में जो Genocide किये जिनमें स्वतंत्रता सेनानी नारायण राव सावरकर जैसे क्रांतिकारी की नृशंस हत्या भी थी। Gandhi and Godse (A review and A critique) नामक पुस्तक जो Koenraad Elst द्वारा लिखित व Voice Of India New Delhi द्वारा प्रकाशित पुस्तक में महाराष्ट्र में हिंदू ब्राह्मण हत्याकांड के उल्लेख है।
1990 में कश्मीर में रलिफ़-खलीफ-गलिफ़ तो आपको ध्यान ही होगा जिनके अर्थ है, इस्लाम को अपनालो, यहां से भाग जाओ या मारे जाओ। प्रत्यक्ष दर्शी परिवारों के बयान सुनकर तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।लाउडस्पीकर से स्पष्ट आवाज़ आ रही थी कश्मीर छोड़कर चले जाओ घाटी आबाद रहेगी हिंदू आदमियों के बिना लेकिन हिंदू औरतों के साथ। (कई interview व video उपलब्ध हैं।)
निष्कर्ष:- घटनाएं तो काफी हैं लेकिन मैं ध्यान करवाना चाह रहा हूं कि जो लोग इन घटनाओं के साक्षी है या जिसके साथ बीती है, जिसे वर्णित घटनाओं का ज्ञान है उनके लिए तो ठीक है अन्यथा बाकी लोगों के लिए तो हम Radical ही हैं। इसमें दोष हमारा है ही नहीं। हमें radical समझने वाले अल्पज्ञानी लोगों का है जो जानकारी के अभाव में या राजनीतिक चश्में से हमें देखते हैं।
कमेंट में बताना कि आपके हिसाब से हिंदू मुस्लिम कौन करता है?
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