क्यों 2026 के भारत को अपना इतिहास स्मरण नहीं है???
1840 में लोगों को इतिहास का ज्ञान है, 1950 के भारतीयों को इतिहास का स्मरण है,
लेकिन 2026 के भारत को इतिहास स्मरण क्यों नहीं ???
सब प्रकार के शोध करने के बाद उत्तर मिलेगा कि - क्योंकि भारत पिछले संघर्ष के सदियों में एक दिन भी ऐसा नहीं था जब स्वतंत्रता के लिए प्रयासरत न रहा हो और जब विदेशी ताकतें इस प्रकार की बातों का शोध करते हैं चाहे 1857 की क्रांति के बाद उन्होंने किया या चाहे 1942 के बाद उन्होंने किया।
बाद में बंटवारे में बांटने की राजनीति के साथ कुछ राजनैतिक व्यक्तियों से मित्रता की और इतिहास के स्वर्णिम काल को मिटा दिया गया।
इंटेलिजेंस के साथी बताते हैं कि चर्चिल और समकालीन अंग्रेजी हुकूमतों के वरिष्ठ नेता कहते थे कि को भारत को कभी उठने नहीं देंगे, काले अंग्रेज बना देंगे, मन अंग्रेजों का रहेगा आदि।
इसलिए Deep State और उनके एजेंट उन ताकतों को भारत में समृद्ध करती हैं जो भारत को "भारतवर्ष" न बनने दें। हमको यह भी ध्यान रखना होगा कि सीक्रेट ऐजेंसी के काम में भले ही नेता, कमांडर मर जाये लेकिन उनकी सोच के काम सदियों तक ऐजेंसी करती रहती है जब तक की यदि उसी स्तर का अधिकारी इस पर रोक न लगा दे, जिस स्तर से पहले निर्देश दिए गए थे, अभी यह काम चल रहा है इसके प्रमाण है। वह लगातार प्रयासरत हैं क्योंकि उन्हें ज्ञात है और शायद हमें नहीं कि
पहले इतिहास विस्मरण होता है,
फिर आत्मविश्वास धूमिल होता है,
फिर गौरव नष्ट होता है,
फिर शंका का बीज उत्पन्न होता है,
फिर आत्मग्लानि जन्म लेती है,
फिर अंत में सर्वनाश होता है।
इसी क्रम में सब चलता आया है।
भले ही आज की दुनिया का विज्ञान भारत की बातों को और उन सभी अनुष्ठानों को वैज्ञानिक सिद्ध कर रही हो, लेकिन पिछली सदी में जो हमारी परंपराओं का मजाक बनाया गया, जिससे प्रभावित होकर हमारे देश के जवानों ने प्रश्न किया (हालांकि उनको शोध करना चाहिए था) लेकिन एक विदेशी सोच के प्रभाव के कारण उन्होंने केवल प्रश्न किया व उसके पीछे की वैज्ञानिकताएं व कारण जानने का व समझने की कोशिश भी नहीं की।
जबकी भारतीय तार्किक मन कहता है कि अगर मेरे अंदर कोई प्रश्न उत्पन हुआ है तो मैं उसको हल करके रहूंगा,
हनुमान, ध्रुव, प्रह्लाद, पिप्लाद, नचिकेता इनके उदाहरण तो हैं ही, लेकिन मैं आपको 100- 150 साल पुराने उदाहरण दूंगा ताकि आप उनसे अपना संबंध स्थापित कर सकें।
संकेत दूंगा समझिए
- नरेंद्र को जब लगा की गुरु रामकृष्ण परमहंस सिर्फ कल्पना कर रहे हैं अनुभव नहीं तो उन्होंने उनसे सीधा प्रश्न किया कि मैं भी दर्शन कर सकता हूँ क्या? तो वह जैसा रास्ता गुरुवर ने बताया उस पर चले मां काली के प्रत्यक्ष दर्शन किए और नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद हो गए।
- शिवकर बापूजी तलपड़े को जब महर्षि भारद्वाज का प्राचीन "विमान शास्त्र मिला" तो उन्होंने उस पर शंका करने की बजाय उनके सूत्रों का प्रयोग किया और भारत की जमीन पर मुंबई के चौपाटी में 1895 उन्होंने जहाज उड़ा कर दिखाया।
- भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने विद्युत चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) और भौतिकी (Physics) के मूल सिद्धांतों से "वायरलेस तकनीक" विकसित की।
वैज्ञानिक पद्धति होती है जिससे हम अपने मन में आने वाले प्रश्नों का हल निकाल सकते हैं अन्यथा आप केवल प्रश्न करेंगे और उत्तर नहीं चाहेंगे तो वह केवल एक विरोधाभास प्रकट करेगा किसी समस्या का हल नहीं होगा।
हालांकि आज के युवा से हमें बहुत अपेक्षा है यह सोशल मीडिया का उपयोग करके रिसर्च भी कर रहे हैं, ज्ञान को आगे फैला भी रहे हैं, जड़ों को भी सामने ला रहे हैं, अपनी सोई हुई सभ्यता को प्रकट में लाकर जो इतिहास धूमिल हो गया था उसे सबके सामने वापस चर्चा में लाकर उनको प्रसिद्ध करने का काम कर रहे हैं, वह जो गौरव जो कहानी सुप्त अवस्था में था उसकी अनुभूति आज युवाओं के साथ प्रत्येक भारतीय करता है। वह जो आत्मग्लानि का एक कालखंड था जिसे अब धीरे-धीरे भारत से जाना होगा क्योंकि अब युवा-किशोर संभल गया है, स्वाध्याय कर रहा है वह प्रशंसनीय है कि अब वह गहराई में जाकर ढूंढने का प्रयास कर रहा है यह वंदनीय है ऐसे सभी युवाओं को अभिनंदन है। इन्हीं युवाओं के कारण भारत पुनः दुनिया के शीर्ष पर होगा ऐसी अपेक्षा है लेकिन यह यात्रा अभी लंबी है, हम सबको थकना नहीं है बस सतत् चलना है। 1000 वर्ष की संघर्षशीलता के बाद अब यदि हम विश्राम की स्थिति में आ जाएंगे तो इसका अर्थ यह होगा कि फिर आगे कुछ हजार वर्षों की संघर्षता को आमंत्रित कर बैठेंगे। तो हमें चाहिए यही कि हम प्रयासरत रहें वह किसी पर अंधा विश्वास करने की अपेक्षा शोध पर ध्यान दें।
।।भारत माता की जय।।
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