भारत माँ का बेटा हूं मैं सच पर मिट्ने वाला हूँ , सवा अरब की ताक़त का मैं महिमां गाने वाला हूं। इतिहास देखकर बाबर का मैं रामकथा का गायक हूं, जो शीश काटदे दुश्मन का उस कसौटी का परिचायक हूं . (ओर सुनिए) मैं आदर करता हूं बुद्ध और महावीर के कथनों का, मैं नमन करता हूं गाँधी के समरसता वाले वचनो का लेकिन मैं अहिंसा का सन्देश नहीं गा सकता हूं, साढ़े 7 लाख की कुर्बानी को नाज़ायज़ नहीं कह सकता हूँ (आपको मेरी हर कविता कहीं न कहि उन 7L 32h 700 के लगभग क्रांतिकारी बलिदान हुए उनकी याद ज़रूर कराएगी, उनके बिना हम कुछ भी नहीं।) (भगवा को अपशब्द कहने वाले ज़रा सुनले क्या है भगवा) सुबह के उगते सूरज का परम रंग है भगवा पवित्र तिरंगे की पहली पट्टी भी तो है भगवा भगत सिंह का गाया बसंती चोला भी तो है भगवा गोविंद, शिवा, प्रताप ने भी तो फहराया है भगवा शौर्य और शक्ति का प्रतीक जिसे कहते है हम भगवा परमपिता का मानव को दीया हुआ वरदान है भगवा (गलती करे वो व्यक्ति बुरा बुरा न कोई पंथ) (सेक्युलरिस्म देखना साहब .....) भगवा जिसे तुम आतंकवादी सरे आम कह जाते हो शांति प्रियों के सौ- स...
बचपन से आज़ादी बचपने से आज़ादी मांग रहा है , ये कितना नादान है , इसे क्या पता ये जीवन का बीतने वाला सबसे सूंदर काल है। लगता है ये सबसे अमीर इंसान है क्योंकि इसे कोई टोकता है, जो आज़ाद हो गए उन गरीबों से पूछो उन्हें अब कौन रोकता है, ये कुछ बरस बिताले अमीरी के धीरे-धीरे खोता हुआ राग है , इसके आगे बढ़ेगा तो समझेगा ना वैसा अहसास ना फाग है , आने वाले तेरे जन्मदिन और त्यौहार भी देखेंगे आज़ादी वाले जश्न, जिसमे तेरे सहकर्मी और यार है लेकिन तू ढूढ़ता अपना खानदान है। बचपने से आज़ादी मांग रहा है , ये कितना नादान है , इसे क्या पता ये जीवन का बीतने वाला सबसे सूंदर काल है। अभी संघर्ष शुरू नहीं हुआ है इनका या बिन मांगे सब मिला है, तभी नादानियों में बात कह रहा इसे न होने का अहसास कहां है, हर कदम चलना या मंजिल की और बढ़ना जिनके दम प...
*व्यक्तिगत हित से बड़ा राष्ट्रहित* *संदर्भ :- `डॉ गोपीनाथ शर्मा` (राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार)* *`D.R. भण्डारकर` (20वीं सदी के प्रसिद्ध इतिहासकार)* वर्ष 1020 का समय था। यह वह काल था जब वर्ष 1000 से 1027 तक 17 बार महमूद गजनवी ने भारत के विभिन्न हिस्सों से लूटपाट की जिसमें सोमनाथ का मंदिर भी प्रमुख स्थान था। इस समय मेवाड़ के शासक गुहिल राजवंश के शासक व "बप्पा रावल" (कालभोज) की 7 वीं पीढ़ी के वंशज शासन कर रहे थे। राजा चंद्रभोज का शासन था। वे ज्ञानी, प्रतापी, न्यायप्रिय, वीर योद्धा व प्रजा पालक शासक थे। एक बार कामुकता के आवेश में एक कन्या के साथ दुर्व्यवहार कर बैठे। दरबार बुलाया गया व न्याय की मांग की गई। राजा ने स्पष्ट कहा कि कन्या और उनके पिता जो भी दंड कहेंगे राजा उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे। उस समय में बलात्कारी को देश निकाला अथवा मृत्यु दंड दिया जाता था। यह वो समय था जब भारत के विभिन्न हिस्सों में महमूद गजनवी का लूटपाट चल रहा था। कन्या के पिता ने राजा को उनकी भुल का अहसास करवाया व तत्कालीन परिस्थितियों का भान करवाया व सेना को नेतृत्व प्रदान देने हेतु रा...
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