भारत एक हिन्दू राष्ट्र है। #facts

 


भारत हिंदू राष्ट्र है सबूत #FACTS के साथ समझते हैं . 

इस बात को हम यूँ समझते हैं की अपने इस भारत देश में जो कुछ  भी default या यूं कहें की बिना CONTEXT के कहा जाता है वो सिर्फ एक ही समाज की और संकेत करते हुए कहा जाता है। हम सभी जानते है की इस समाज का नाम है  वैदिक  सनातन  मानव  धर्म  जिसे  हम  साधारण  भाषा  में  हिन्दू  धर्म  से  जानते  है।

              इस देश में जो भी चीज कही गई, सिखाई गई वह केवल उसी के लिए थी जो इस देश का नागरिक है या यूं कहूं कि प्राथमिक नागरिक है। हमेशा इस देश में जो भी शिक्षाएं दी गई वह हिंदुओं को ध्यान में रखकर दी गई। इस देश में जो भी कमियां गिराई गई वह हिंदुओं को ध्यान में रखकर गिनाई गई। इस देश को कैसा होना चाहिए यह भी जब बताया गया तो भी हिंदुओं के आधार उस पर रखे गए। इस देश में किस प्रकार का सहनशीलता का होना चाहिए वह भी हिंदुओं के शास्त्रों को ध्यान में रखकर बताया गया। इस देश की सभी सरकारी संस्थाओं के श्लोक संस्कृत में है। इस देश में रामायण, महाभारत व गीता का गायन किया जाता है, और सदियों से किया जा रहा है। इस देश में अगर किसी को कोई प्रतिक्रिया करनी है वह हिंदुओं के खिलाफ ही करता है चाहे विपरीत्ता करने वाला व्यक्ति किसी भी वर्ग समाज का हो। किसी को अगर कोई अपना एजेंडा साबित करना है तो वह हिंदुओं के खिलाफ बोलकर ही करता है। किसी को अगर इस देश में अराजकता फैलानी है तो वह हिंदुओं को ही गुमराह करके करते हैं। जब हर चीज का कॉमन फैक्टर या यूं कहे की आधार हिंदुत्व है, हिंदू है तो यह देश और कुछ कैसे हो सकता है?

             यह देश आदि अनादि सनातन काल से हिंदुत्व के रास्ते पर चलता हुआ आया है चलता है और चलता रहेगा। लोग कहते हैं कि हिंदू शब्द बाद में आया सही कहते होंगे लेकिन आज आप जिनको हिंदू कह रहे हैं वह इस दुनिया की सबसे पुरानी सिविलाइजेशन है, सभ्यता है, सत्य है, परंपरा है और वैदिक काल जिसे हम कहते हैं वहां तक इस दुनिया में पहले कोई सभ्यता हिंदुत्व के अलावा और कोई नहीं थी।

            फैशन, त्योहार, अर्थव्यवस्था, कृषि, कला, कलाकार, राजनीती और बाजार भी  सभी  की  योजना यह होती  है  की  हिन्दुओं   को  आकर्षित कैसे  किया  जाए । फिर  आप  महसूस  करेंगे  की  हिन्दू  को  ही  अपनी  तरफ  लाने  के  लिए  उनको  बहकाया  जाता  है। हिन्दू  समाज  की ही  ताकत के कारण यह  देश  संविधान  से  देश  चल  रहा  है। सैमेटिक ताकते  जहा  ज्यादा  हावी  है  उन  क्षेत्रो  का  हाल  आपके  सामने  है ।

           CONVERSION भी  हिन्दू ,सिख ,जैन  or बोध  इन्ही  का  किया  जाता  है, जिनके  संस्थापकों का  सीधा  समबन्ध  वैदिक  सनातन  मानव  धर्म  से  रहा  है।  इसीलिए  हमारे  समाज  के  सभी  को  एक  करके  हिन्दू  या  हिंदवी  कहा जाता  है। सैमेटिक तंत्र हमारी  ताकत  जानता  है  इसीलिए  हममें  वर्गीकरण  करके  हमे  तोड़ने  की , बाँटने  की  कोशिश  करता  है।

#FACTS  #तथ्य 

ये comman sense से  बताइये  की  कैसे निश्चत करेंगे  की  कोई  राष्ट्र  किस  सभ्यता  से  अधिक  सम्बंधित  है ?

                 जनसँख्या: लेकिन नैरेटिव से तो  हम  बंटे हुए हैं  या  यु  कहु  की  हमें  बांटा गया  है। हम कहते हैं की 36 बिरादरी  बराबर है, सभी हिन्दू है और ऐतिहासिक बात  सभी  36 की  36 बिरादरियां  राजवंशी  हैं। महाभारत काल से  लेकर 19 वीं शताब्दी तक सभी ने वर्तमान भारत के किसी न किसी हिस्से पर शासन किया है। राज्य चलाने के लिए शिक्षा की होगी वह ब्राह्मण भी हुए होंगे,सेना भी होगी तो वह क्षत्रिय भी होंगे, अर्थव्यवस्था चलाई होगी तो वैश्य भी रहे होंगे और  निर्माण व मेहनत के दैनिक काम भी राज्य में होते है तो क्षुद्र भी सभी राजवंश के लोग अपने अपने समय में रहे होंगे।

             लेकिन 1881 की जनगणना के  समय ब्रिटिश ऑफिसर्स ने यह लिखा की कौन ऊंचा है और कौन नीचा। हम कर्म प्रधान लोग थे, गांव से सम्बंधित सिस्टम चलता था और प्रत्येक कार्य जरुरी था, है और रहेगा। बिरादरियों के नाम भी  कर्म के आधार पर पड़े।

(ब्राह्मण, जाट, राजपूत, गुज्जर, अहीर, अग्रवाल, रोड, कुम्हार, सुनार, खाती, माली, धोबी, नाई, तेली, दर्जी, जोगी, भील, मीणा, बाल्मीकि, चमार, धानक, जुलाहा, मनियार, लोहार, सपेरा, ओढ़, बिश्नोई, डाकोत, स्वामी, गवरइया, नायक, कुर्मी, डूम, मेव, रहबारी, शिल्पकार.) अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार कुछ -कुछ उपनाम अलग बिरादरी वर्ग में हो सकते है यह हर राज्य की जनसँख्या व कार्य की प्रकृति अनुसार संभव है।)

               स्वतंत्रता का आधार: मै इसे ऐसा नहीं लिखना चाहता था की देश बनने का आधार। क्योकि भारत का वर्णन तो रिलिजन की पॉलिटिक्स से पहले का है, इसीलिए मैंने आज़ादी को आधार बनाया है।

               देश के बंटवारे के समय जिन्नाह द्वारा यह कहा गया की मै हिन्दुओ के साथ नहीं रह सकता। हमारी जनसँख्या अधिक है हमे अलग से मुस्लिम देश चाहिए। 1935 की मुस्लिम लीग ने यह मांग की और एक देश 14 अगस्त 1947 को मुस्लिम राष्ट्र बना और दूसरा हिन्दू राष्ट्र। तत्कालीन लीडरशिप पर सैदेव प्रश्न होंगे की वो इतने बोल्ड नहीं थे की सच को खुलकर बोल सकते। क्योकि नेहरू जी और गाँधी जी का मुसलमान प्रेम इस घोषणा की सबसे बड़ी बाधा था। हालाँकि मुसलमान कभी भी गाँधी जी का यह प्रेम नहीं समझ पाए। खैर धर्म के आधार पर वर्गीकरण हुआ। आज मुस्लिम राष्ट्र तो मुस्लिम राष्ट्र है लेकिन हिन्दू राष्ट्र को हिन्दुस्थान कहने मात्रा से कुछ लोग तड़प उठते है और देश खतरे में संविधान खतरे में आ जाता है।

               प्राचीन निशानियां और आदर्श: भारत में जो भी प्राचीन है वो सब कुछ आज हिन्दू कहे जाने वाले समाज से जुड़ा हुआ है, चाहे मंदिर हो या चाहे गुफाएं हो, स्क्रिप्चर्स हो या मुर्तिया हो, अभिलेख हो या भाषा हो सभ्यता हो जो कुछ है पुरातत्व सर्वे में निकालता है वो इसी एक हिन्दू सभयता की और अपना इशारा करता है।  

             संविधान: इमरजेंसी (1975-1977) से पहले तक भी भारत के वैदिक परम्पराओं, पौराणिक व इतिहासिक महापुरषों को संविधान निर्माण समिति ने स्थान दिया था। समिति ने अन्य देशो के साथ मनुस्मृति को भी नीतिगत आधार बनाया है तभी तो संविधान की आत्मा जो बाते करती है और प्रस्तावना में जो लिखा है वैसा सैमैटिक रिलिजन में संभव ही नहीं है। जो वैल्यूज, जो समानता और जो विस्तार की बात प्रस्तावना में है वो केवल भारत के पंथ ही कर सकते है जिनका स्त्रोत सत्य सनातन वैदिक मानव धर्म है जिसे आज हम हिन्दू कहते है।

           आप लोगों के comments अपेक्षित हैं। मैंने आपको साबित कर दिया की भारत हिन्दू राष्ट्र है। रही बात घोषणा की तो भारत के ऋषियों ने बहुत पहले से इसे हिन्दू राष्ट्र घोषित किया हुआ है। आवश्यकता है तो भारत को हिन्दू राष्ट्र मानकर संविधान और सत्य सनातन वैदिक मानव धर्म अनुसार कार्य करने की ।

जय हिन्द  जय हिन्दू जय हिन्दुस्थान 

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