amar balidani chandershekhar aazad
जब चंदरशेखर आज़ाद जी को आतंकवादी कहा गया तब नम आँखों से डॉ हरिओम पंवार जी ने लिखा और आक्रोश से मै आपसे साँझा कर रहा
विषय सन्दर्भ :- डॉ हरिओम पंवार
आत्मा रोती है साहब जब कोई बलिदानी क्रांतिकारियों को गाली दे जाता है;
राजनीती के सांचे में भारत माँ का आँचल नीलाम कर जाता है;
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बड़े बड़े बुद्धिजीवी छोटी छोटी बातों पर बोलने वाले लोग इस बात पर जब चुप रह जाते है
उनको जब एक अमर बलिदानी को आतंकवादी .. कहा गया तो कोई फर्क नहीं पड़ा पर मै
इस पर बोलने की हिम्मत करना चाहता हु
चुप रह कैसे सकते है परोधा इस देश के, समझा उनके परिवेश को नहीं जा सकता हैं
चुनावो में क्रांतिकरियो के गीत बजाये जाते है, पीठ पीछे छुरा उनके खोपे कैसे जा सकता हैं
बलिदान होने के बाद जो उन वीरों को आतंकवादी बतलाते है;
फिर भी इस भारत देश में चैन से जी पाते है;
किसी का खून क्यों नहीं खोला इस मुद्दे पे पता नहीं हैं
लेकिन मैं चुप रह जाऊं मेरा ज़मीर इसकी इज़ाज़त देता नहीं है
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मेरे मन,शरीर की व्यथा बताना चाहूंगा अगर आपको लगे हर किसी को ऐसे ही प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी तो समर्थन करना साहब
और जो आज हो रहा है कोई भी माइक उठाकर किसी भी क्रांतिकारी , महान आत्मा या देश के बारे में गलत बोल रहा है उसको उसकी औकात मेरा समर्थन करके दिखाओ
लहू उबलरहा है मस्तिष्क फड़करहा है जी
ना जाने क्या करने का मन कर रहा है जी
लेकिन जो साथ देते वो चुप रह जाते इस बात पर
ना भूले वो भी कम नहीं किसी गद्दार से है जी *
हर क्रांतिकारी मेरा भाई है मेरे परिवार का हिस्सा है*
ना जाने उनके तिल तिल मरने का याद जो किस्सा है
ये जो चुप्पी साधी है ये इस क्रम को बढ़ाने का हिस्सा हैं
वर्तमान में जो हो रहा ये उसी कहानी का किस्सा है
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अगर आप उसी समय बोले होते तो आज किसी की हिम्मत नहीं थी की मेरे देश को , क्रांतिकारियों को अपशब्द बोल जाये
अपनी चाहत के बारे में मैं आपको बताना चाहता हु साहब कोई हिम्मत नहीं करता पर मेने अपनी मोहब्बत बताने की हिम्मत की है मेरा समर्थन करना
मोहब्बत करते होंगे लोग किसीसे भी मैं वो उपभोगी इंसान नहीं
जिसका दिल इनके लिए ना धड़के उसकी मुझसे कोई पहचान नहीं
उनके हर बलिदान पर मै जान छिड़कता हूँ
क्योंकि मै हरेक क्रांतिकारी से प्यार करता हूँ
इक आह्वान आज मैं आप सब से करना चाहता हूँ
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मुझे आशीर्वाद से विदा करना की मैने आपके बारे में आपकी जेब के बारे आपके धन को
बचने के विचार से लिखा है
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किसी एक को भी अपना मान कर
7 लाख 32 हज़ार 400 के लगभग कुर्बानियां केवल अंग्रेज़ो से आज़ाद कराने के लिए दी
गयी और ये गलत बयानबाज़ी देने वालो को ये मज़ाक लगता है आप इनमे से किसी को भी अपना दोस्त, हमदर्द, आदर्श मानकर उनके क़दमों पर चलने की हिम्मत कीजिए ताकि ऊपर जाकर उनसे नज़रे मिला सकें
किसी एक को भी अपना मान कर उस जैसे बनने का प्रयास करो जी
उस वीर के जीवन को गहराई से पढ़ो और जीने की कोशिश करो जी
उसके बाद अपने महीने भर का हिसाब करलीजिए जी
10000 की सिर्फ 7000 का ही खर्च पाएंगे जी


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